बर्फ़ गिरी हो वादी मे, और हँसी तेरी गूँजे।
ऊन मे लिपटी सिमटी हुई, बात करे धुआं निकले
गरम गरम उजला धुआं, नरम नरम उजला धुआं॥
ये वादियाँ ये फ़िज़ायें बुला रही हैं तुम्हे...
हुश्न पहाड़ों का..ओ साहिबा
क्या कहना के बारहों महीने,
यहाँ मौसम जाड़ों का
राम चन्द्र मिश्र का हिन्दी चिट्ठा!
बर्फ़ गिरी हो वादी मे, और हँसी तेरी गूँजे।
ऊन मे लिपटी सिमटी हुई, बात करे धुआं निकले
गरम गरम उजला धुआं, नरम नरम उजला धुआं॥
ये वादियाँ ये फ़िज़ायें बुला रही हैं तुम्हे...
हुश्न पहाड़ों का..ओ साहिबा
क्या कहना के बारहों महीने,
यहाँ मौसम जाड़ों का
Posted by डॉ. राम चन्द्र मिश्र at 12/21/2007 03:24:00 PM 5 comments Links to this post
इस सप्ताहान्त ओम शान्ति ओम देखी, कई महीनों बाद एक नया गीत बहुत पसन्द आया..आप भी सुनिये।
Posted by डॉ. राम चन्द्र मिश्र at 11/26/2007 01:34:00 AM 2 comments Links to this post