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Sunday, October 28, 2007

You Can't Stop time..yet...- समय को रोक नही सकते..पर..

ये तो कर ही सकते है...

कल रात २ बजे यूरोप के कई देशों की घड़ियाँ एक घन्टे के लिये रोक दी गयीं, अर्थात..ग्रीष्मकालीन समय (Day-Light Saving Time or DST) का अन्त और मानक समय (यहाँ पर GMT+1) का प्रारम्भ।

ये मानक समय लगभग ५ महीनों के लिये होता है और पुन: मार्च महीने के अन्तिम रविवार को रात को २ के बाद सीधे ४ बज जाते हैं, और कानूनी समय (ग्रीष्मकालीन या DST) प्रारम्भ हो जाता है।

तस्वीर: साभार विकीपीडिया अन्ग्रेजी से

अधिक जानकारी: विकीपीडिया: Day-Light saving Time

Thursday, October 18, 2007

कोई तो ज़ादू है - Its magic?

कि ऐसा कैसे हो रहा है...

ScreenShot307

Saturday, June 23, 2007

Atlantis Landing NASA Stream Video

आज रात अटलांटिस के धरती पर पहुँचने से लगभग १० मिनट पहले शुरू होता है पहला विडियो और १० मिनट से कुछ अधिक अवधि का है।

इस विडियो को  एक MMS Stream Recorder  की सहायता से रेकॉर्ड करके यू ट्यूब पर अपलोड किया।

अट्लांटिस ग्रीनविच मानक समय के अनुसार २२ जून २००७ को शाम के ८ बजकर ४९ पर पृथ्वी पर उतरा। उसके बाद का लगभग बीस मिनट तक का दृश्य पहले विडियो मे है।

दूसरे विडियो मे उतरने के २० मिनट के बाद का दृश्य है। तत्पश्चात जब अन्तरिक्ष यात्रियों को यान से बाहर निकाला जा रहा था तो live stream  के स्थान पर रेकार्डिन्ग दिखायी जाती रही।

एम एम एस स्ट्रीम की लिन्क के लिये नीरज दीवान को धन्यवाद एवं आभार।

इससे सम्बन्धित तस्वीरें यहाँ पर देखी जा सकती हैं।

Sunday, April 08, 2007

From Cameroon- Central Africa

मेरे एक मित्र Dr Jean Ngoune, Cameroon  के एक विश्वविद्यालय मे प्रवक्ता हैं। यहाँ (UNICAM) से दुबारा Ph D कर रहे हैं, Inorganic Chemistry से।

पिछले दिनों वे अपने देश होकर आये..और बहुत सारी तस्वीरें भी लाये जिनसे वहां के जीवन की झलक देखने को मिली।

प्रस्तुत तस्वीर वहाँ के एक पारम्परिक उत्सव की है।

Cameroon FestivalHPIM0718HPIM0719

 

अन्य आकार मे देखने के लिये तस्वीर पर Click   करें।

Monday, January 02, 2006

वापस इट्ली मे

मित्रों मै अब वापस इटली आ गया हू, मुझे कुछ टिप्पणियां मिली जिनमे सुनील जी के बारे मे बताया गया, इस सन्दर्भ मे मै कहना चाहूंगा कि मेरा उनसे सम्पर्क पिछ्ले महीने हो चुका है, और मै भी उनके ब्लाग का नियमित पाठक हू|

आप सबको नव वर्ष की शुभकामनायें | मेरा हैप्पी न्यू इयर तो बस मे ही हो गया (मनाया) था, वो इस लिये कि मै 31 की सुबह ग्रीनोबल से चला था, सुबह 4:30 पर मै और डा पाठक रेलवे स्टेशन के लिये चले, रात को भारी हिमपात हुआ था और हमें अपनी ट्रालियों को घसीटने मे .... याद आ रही थी: वही हिम और हिमपात जो कल रात को यहां के भारतीय होटल से रात का खाना खाकर वापस आते समय रोमांचक लग रही थी| आखिर हम 1 किलोमीटर चलकर गार(स्टेशन) पहुंचे, पाठक जी खुश थे कि उनकी ट्रेन सही समय से है जिससे  फ्लाइट मिस नही होगी| मुझे यहा से शाम्ब्री जाने के लिये 10 बजे तक तीन गाडिया थी और वहा से मुझे 10:58 पर मिलान के लिये जाना था, फिर भी मैने सात बजे वाली सवारी की और आठ बजे शाम्ब्री आ गया, ठन्ड बहुत थी मैने स्वयँ को कवर किया और स्टेशन के बाहर निकल गया, मेरे पास घूमने का समय तो था लेकिन -5 डिग्री का बाहरी तापमान और Ice बन गयी snow पर टहलना आसान नही था इसलिये मै एक बार मे घुस गया जहा गरमा गरम काफी पी, चिप्स खाये और आधे घंटे बैठकर वापस स्टेशन के प्रतीक्षालय मे ही बाकी की प्रतीक्षा की| यहा से टी ज़ी वी पर बैठना था जो पेरिस से मिलान के मार्ग पर चल रही थी यूरो सिटी नाम से, सामान आदि रखने के बाद मैने समय बिताने के लिये अपने लैपटाप पर फिल्म लगा ली, वही जो डा शशांक ने लियान मे मुझे दी थी और बताया था कि अमेरिकन क्लासिकल फिल्म इतिहास मे इसको एक तरफ और बाकी सब को एक तरफ करके तुलना होती है, और जिसका नाम है, Gone With The Windयह 4 घंटे की फिल्म है जिसका पहला भाग मैने लियान से आते समय देखना प्रारम्भ किया था| 2:45 पर मिलान का समय था लेकिन यह पहले से ही 15 मिनट लेट थी फिर हम 3 बजे मिलान मे थे, यहा भी काफी बरफ थी और वायु मे गलन, मै बाहर निकला तो इस बार दूसरी तरफ चला गया और एक ऐसी दुकान मे जा पहुंचा जहां मेरे लिये कुछ उष्ण कटिबन्धीय खाद्य पदार्थ उपलब्ध थे, मैने 5-6 किलो सामान खरीद लिया|



यहा से 17:10 पर ट्रेन थी, रुचिकर मसला ये हुआ कि जिस डिब्बे मे मेरा आरक्षण था, उसके साथ कुछ समस्या थी जिसका निदान करते करते ट्रेन 15 मिनट लेट हो गयी पर समाधान न मिला, सो उसमे न ही प्रकाश रहा और न उचित तापमान, अतः कैरोत्सा (डिब्बा) बदलना पडा, 21:30 पर फैल्कोनारा मे दूसरी ट्रेन ली उससे फैब्रियानो पहुंचे जहा से वो बस ली जिसने कैसल्रायमोन्दो पहुंचाया यहा बस बदली और अपने घर के पास उतरे रात के 00:30 पर|

Monday, December 26, 2005

ग्रीनोबल (फ्रांस) यात्रा

24 तारीख की सुबह मै साढे पांच बजे कैमेरिनो से ग्रीनोबल जाने के लिये निकला, यह एक बहु चरणीय यात्रा थी सबसे पहले कैमेरिनो से बस द्वारा कस्त्लेरऐमोन्दो 6:05 पहुंचे, वहा से अल्बाचिनो 6:40, फिर फल्कोनारा 7:53 उसके बाद बोलोन्या, 10:22 पर अगली ट्रेन मिलान के लिये थी 11:35 पर मेरे पास एक घंटे का समय था तो मैने वही साथ लाया हुआ ब्रेड बटर और मैक डोनाल्ड से फ्रेंच फ्राई और कोक लेकर खाना खा लिया| जब प्लेट्फार्म पर पहुंचे तो पता चला कि वो ट्रेन 3 घंटे लेट है, मेरी अगली ट्रेन मिलान से ग़्रेनोब्ले के लिये 4:13 शाम को थी, मेरे पास समय भी था और एक यूरोस्टार 12:16 पर जाने वाली थी जो 2 बजे पहुंचाती, मैने टिकट बदलवाया, 12.60 यूरो अतिरिक्त देकर; और सौभाग्य या दुर्भाग्य से ये भी 15 मिनट ही लेट थी,इस प्रकार मै 2:10 पर मिलान आ पहुंचा, अब मेरी तमन्ना थी मिलान का विश्व प्रसिद्ध चर्च देखने की मेरे पास दो घंटे का समय था| मैने अपनी इटालियन भाषा ज्ञान का उपयोग करते हुए, वहा तक पहुंचने का तरीका मालूम किया और पीले लाइन की ट्राम से दुओमो (चर्च) तक पहुंच गये, नज़ारा वाकयी भव्य था लेकिन ढका हुआ क्योंकि कुछ मरम्मत का कार्य ज़ारी था सामने की तरफ से, फिर भी मैने तस्वीरे ली, चारो तरफ से घूमकर देखा, बाज़ार भी और समय से स्टेशन भी वापस आ गये, इस बीच घर फोन भी किया और बताया कि फ्रांस जा रहा हू, ट्रेन पर बैठने के उपरांत मैने पाठक जी को भी फोन किया जिनके पास मै वहा एक सप्ताह रहूंगा, वो सप्ताहांत को भारत के लिये प्रस्थान कर रहे है| ये वही फ्रांस की मशहूर टी. जी. वी.थी जिसकी तेज गति के बारे मे मै कई बार पढ चुका था, लेकिन जब यह एक स्टेशन पर 15 मिनट के लिये ठहरी तो मै चिंतित हो गया क्योंकि मेरे यात्रा की आखिरी ट्रेन शम्ब्री से ग्रेनोब्ले के लिये 8:11 पर थी और इसको 7:56 पर वहा पहुंचना था, और पहुंची भी लेकिन 8:08 पर और मै ट्रेन पकड्ने के लिये दौडा, मुझे प्लेटफोर्म भी ढूंढ्ना था, अंततः मै समय रहते ट्रेन मे दाखिल हो गया, वहा एक वियतनामी बालिका ने मेरी सहायता की|
मै ग्रीनोबल पर उतरा और चिन्हो का पीछा करते हुये, निकास की और बढे, और भूतल (बाकी का मार्ग भूमिगत है) पर पहुंचते ही पाठक जी सामने से आते दिखायी दिये| 15 मिनट में मैं उनके छठे तल पर स्थित निवास पर पहुंच चुका था|
सब कुछ बढिया और व्यवस्थित था, समस्या एक ही थी, कि थी ही नही, हम लोगो ने साथ खाना खाया और बहुत सी बातें कीं,और फिर वे रात के लिये थोडी दूर स्थित सुशील जी के यहां चले गये, मै थकान अनुभव तो नही कर रहा था पर एक बार नीन्द लगी तो सुबह 6 बजे ही जागे|
सुबह 8 बजे पाठक जी आये उसके बाद पौने दस बजे हम लोग बाहर निकले उनको उनिवेर्सित्य जाना था वहा का सब काम निपटाने, बोले कि लंच में वापस आऊंगा फिर साथ चलेंगे| वे चले गये मै घूमता रहा, मौसम बहुत ठंडा था, मेरे पास ग्लोवेस भी नही थे, 30-40 मिनट बाद मै चर्च के अन्दर भी गया वहा इसाइयों के धर्मगुरू का व्याख्यान चल रहा था कुछ कुछ विशिष्ट प्रकार की ध्वनियों से सुसज्जित. बाहर का तापमान शून्य के पास ही रहा होगा, इसलिये मै वापस आ गया और कुछ पत्रिकाए पढ्ने लगा| 11:30 के लगभग पाठक जी ने फोन किया कि वे लंच मे नही आ पाएंगे, पूछने पर कहा कि 3 बजे तक, 2 बजे मैने कल का रखा दाल चावल खाया और कुछ देर अपने तोशिबा के साथ बिताने के बाद मै लेट गया, सोचा वे आयेंगे तभी उठेंगे, पर वे नही आये मै 6:30 पर उठा और बाहर गया एक दुकान से इंटर्नेट से सन्युक्त होकर ई मेल चेक किये, कल डा त्रिपाठी का जन्म दिन था उन्होने मेरी शुभ्काम्नाओं के लिये धन्यवाद भेजा था| जरमनी और कनाडा से भी एक एक मेल था मैन जब घंटे भर बाद लौटा तो पाठ्क जी मौजूद थे|