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Monday, March 31, 2008

सरल वर्डप्रेस २.५ अपग्रेड : Easy Upgrade to WordPress 2.5

The stable version of WordPress 2.5 is available to download and install from 29th march 2008 on http://wordpress.org/download.

Given here is a way to upgrade to WordPress 2.5 from existing WordPress software versions '2.2' or '2.3'; 2.4 is not applicable.WordPress 2.5 Upgrade

वर्ड प्रेस २.५ का स्थिर संस्करण डाउन लोड करने के लिये कल उपलब्ध हुआ। श्री जितेन्द्र चौधरी ने इस बारे मे जानकारी दी और इसकी खूबियाँ गिनायीं। हमने अपने सर्वर पर २ वर्ड प्रेस इन्स्टालेशन अप ग्रेड किये, तो आइये देखते हैं कितना आसान है वर्ड प्रेस सॉफ़्ट्वेयर को अपग्रेड करना।

WordPress 2.5 Upgrade

सबसे पहले वर्डप्रेस वाले फ़ोल्डर का बैक-अप लें जैसे कि किसी एफ़ टी पी साफ़्ट्वेयर द्वारा उस डाइरेक्टरी को अपने कम्प्यूटर पर डाउन लोड कर लीजिये। अगर न करना चाहें तो 'wp-content' फ़ोलडर को जरूर सुरक्षित कर लें। चाहें तो इम्पोर्ट-एक्स्पोर्ट ऑप्शन मे जाकर अपनी ब्लॉग प्रविष्टियों को एक्स एम एल फ़ाइल के रूप मे डाउनलोड कर लें।

WordPress 2.5 Upgrade

अब वर्ड प्रेस की साइट से नया संस्करण वर्ड प्रेस २.५ डाउनलोड कर के फ़ोल्डर खोल लें।सर्वर की वर्डप्रेस इन्स्टालेशन डाइरेक्टरी से wp-admin और wp-include फ़ोल्डर की छुट्टी(Delete) कर दें या इनको अगले स्टेप मे Overwrite कर दें।

वर्डप्रेस २.५ से ये दोनो फ़ोल्डर और बाकी की .php files वर्डप्रेस डाइरेक्टरी मे भेज दें, ध्यान रहे कि wp-content फ़ोलडर को नही कॉपी करना है।

अब अपने ब्लॉग पर लॉगिन करें। वहाँ आपको बदलाव नज़र आयेगा। लॉगिन सफल होने के बाद संदेश मिलेगा कि आपका डाटाबेस अपडेट करना है (Database upgrade required), एक क्लिक से ये काम हो जायेगा (Upgrade WordPress पर क्लिक करें)।

Upgrade complete संदेश प्राप्त होने के बाद Continue पर क्लिक करें और आप वर्ड प्रेस २.५ के डैशबोर्ड पर पहुंच जायेंगे। Wordpress Upgrade

वर्डप्रेस २.५ आ गया इसका मतलब २.४ संस्करण कहीं खो गया, फ़िर भी एक बड़ी कमी रह गयी। WordPress 2.5 Upgrade

Post Slug Option is not available in WordPress 2.5

Tuesday, February 05, 2008

अपने ब्लॉगर/गुगल प्रोफ़ाइल पर वर्डप्रेस ब्लॉग या वेब साइट भी दिखायें

बहुत से हिन्दी चिट्ठाकारों के ब्लॉगर ब्लॉग्स पर टिप्पणी करने पर अक्सर आपको अपने गुगल अकाउन्ट मे साइन इन करना होता है, इससे आप्की टिप्पणी के साथ, आपके नाम पर आपकी ब्लॉगर प्रोफ़ाइल का लिन्क मिलता है।

वहाँ पर केवल आपके ब्लॉगर वाले ब्लॉग्स की लिस्ट (कभी-कभी लम्बी चौड़ी) होती है, जैसे कि यदि आप जीतू भाई या शुक्ल जी के ब्लॉगर प्रोफ़ाइल पर देख सकते हैं।

वैसे शुक्ल जी ने www.fursatiya.com भी ले रखा है, लेकिन आज कल लिखते कहाँ पर हैं, ये तो उनकी प्रोफ़ाइल से पता चलेगा नहीं। देखने को इनकी लिस्ट मे सारे हैं, पर वो हिन्दिनी वाला देखने के लिये रास्ता पुराने वाले से होके गुजरता है।

आप अपनी ब्लॉगर प्रोफाइल सम्पादित करते हुए, चुन सकते हैं कि कौन से ब्लॉग आपकी प्रोफ़ाइल पर दिखं और कौन न दिखें।

अपने वर्ड प्रेस ब्लॉग या अन्य किसी साइट का लिन्क अपनी प्रोफाइल की ब्लॉग लिस्ट मे दिखाने के लिये

१. अपने ब्लॉगर खाते मे लॉग इन करें
२. नया ब्लॉग बनाने के लिये Create a blog पर क्लिक करें
३. आने वाले पृष्ठ पर अपने वर्ड प्रेस ब्लॉग या मनचाही साइट का लिन्क दिखाने के लिये शीर्षक डालें Blog

title के सामने वाले बॉक्स में।
४. Blog address के सामने वाले बॉक्स मे टाइप करके कोई भी उपलब्ध पता ले ले, वर्ड वेरीफिकेशन पास

करें और कान्टिनिउ पर क्लिक कर दें।
५. अगले पृष्ठ पर कोई टेम्प्लेट चुनें और आपका नया ब्लॉग बन गया, जो आपके ब्लॉगर प्रोफ़ाइल के साथ ब्लॉग

लिस्ट पर दिखेगा, अब इसका लिन्क या यू आर एल अपने पसन्दीदा ब्लॉग या साइट से जोड़ने के लिये,

सेटिन्ग्स पर जायें (इस नये ब्लॉग की)
६. सेटिन्ग्स पृष्ठ पर Publishing पर क्लिक करें, आने वाले पृष्ठ पर उपस्थित Custom Domain वाले

लिन्क पर क्लिक करें।
७. यहाँ पर Your Domain के सामने वाले बॉक्स मे अपने वर्डप्रेस ब्लॉग या मनपसन्द साइट का पता डालकर

Save Settings पर क्लिक कर दें।

८. हो गया काम :) उदाहरण के लिये आप मेरा प्रोफ़ाइल देख सकते हैं।

Monday, December 17, 2007

इलाहाबादी खोज-allahabad live online web cam sexy chat

अभी अपने फोटो ब्लॉग की स्टैट देख रहा था, एक ताज़ातरीन विवरण ये मिला कि यदि आप यहाँ क्लिक करेंगे तो पहला खोज परिणाम ये आयेगा (स्क्रीन शॉट देखिये), और ऐसे मे मेरा ब्लॉग बदनाम हो जायेगा।

इसका कारण ये रहा कि इस ब्लॉग पर पिछले दिनो बहुत से स्पाम कमेन्ट्स आये, जिन्हे मैने डिलीट करने की जहमत नही उठायी।

allahabad live online web cam sexy chat

मुझे खेद है कि खोजकर्ता को गुगल ने पहला परिणाम जो दिखाया वो उसको पसन्द न आया होगा :)।

स्क्रीन शॉट पूर्ण आकार मे यहाँ देखा जा सकता है।

Thursday, October 11, 2007

गुगल का इंडिक ट्रान्सलिटरेटर अपनी साइट पर लगायें।

हिन्दी जानने समझने वाला व्यक्ति जब किसी हिन्दी ब्लॉग पर पहुँचता है और यदि अब तक उसने कभी कम्प्यूटर पर हिन्दी मे टाइप नही किया है, तो गुगल का इंडिक ट्रान्सलिटरेशन गज़ेट (टूल)उनके लिये बहुत रोचक और रोमांचक साबित हो सकता है।

सभी हिन्दी ब्लॉग्स (चिट्ठों) जिन पर भी टिप्पणी और खोज (साइट सर्च) की सुविधा है, उनसे अनुरोध है कि वे अपने मुख पृष्ठ के ऊपरी भाग पर इसको स्थान दें।

गुगल के इस औजार को अपने ब्लॉग पर लगाने के लिये इस जाल पते पर जाकर कस्टमाइज़ करके कोड प्राप्त किया जा सकता है।

Sunday, September 09, 2007

भारत जीता, इन्डिया हारी और एड सेन्स के $- INDIA lost, Bharat Won & Adsense $$.

गुगल एड्सेन्स से आज आठ घंटो मे जितनी कमाई हुई उतनी अभी तक किसी महीने मे भी नही हुई थी। मेरे स्टेट काउन्टर ने आज 1415 हिट्स और 2736 पेज लोड्स बताये।

Stat

एड सेन्स खाते का नज़ारा (200 Clicks, 13.39 $ only) ऐसा था।

पहले पेमेन्ट (100 $) के लिये अभी लगभग आठ डॉलर की कमी है। उम्मीद है अक्टूबर तक हो जायेगा, तो सबको दिवाली के अवसर पर मेरी तरफ़ से पार्टी दे दी जायेगी।

प्रति घंटे का ग्राफ ऐसा रहा।

Hourly_Graph_Stat

भारत ने सातवें एशिया कप हॉकी के सेमी फ़ाइनल मे जापान को ४-१ से हराकर फाइनल मे प्रवेश किया जहाँ उसका मुकाबला पूर्व चैम्पियन कोरिया से होगा।

इससे पहले १ सितम्बर २००७ को भारत ने हॉकी के इतिहास में अपनी दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए एशिया कप टूर्नामेंट में श्रीलंका को 20-0 से हरा दिया.

भारत ने 75 साल पहले 1932 में अमरीका को 24-1 से रौंदा था. उसके बाद से भारत की यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है.

Thursday, September 06, 2007

परीक्षण: आइमीफ़ाइड द्वारा गुगल टॉक से प्रविष्टि - Posting through Google Talk Via Imified

आइमीफ़ाइड द्वारा गुगल टॉक से प्रविष्टि - Posting through Google Talk Via Imified www.imified.com
 
अब नये ब्लॉगर पर भी आइमीफ़ाइड द्वारा गुगल टॉक से सीधी पोस्ट करने की सुविधा हो गयी है, पहले अन्य ब्लॉगिन्ग सेवाओं और वर्ड प्रेस पर गुगल टॉक से तुरन्त छापने या ड्राफ्ट भेजने की सुविधा थी। Now, Its possible to post instantly from a google chat window to your favorite Google's blogger blog. For more info just add imified@imified.com  to your google talk. After acceptance of the request send, '?' to get your account details at www.imified.com. Go to your account by choosing from the given options and create a new widget, that's it.
 
Imifiedयह चित्र उस समय का है जब, मै पुराना ब्लॉगर (गुगल एकाउन्ट से जुड़ा हुआ नही)प्रयोग करता था
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
Happy Instant Blogging to Blogger Blog too.

Monday, July 09, 2007

चिट्ठाकारी: दिल से!

Blogging straight from the heartland

रवि रतलामी वैसे तो बहुत बार छप चुके हैं पर इस बार जब हमने उनको Times of India मे देखा तो मन किया कि अपने चिट्ठे पर भी छाप दें, (Exclusive, High quality  तस्वीर जो मिली है )

Tटाइम्स न्यूज़ नेटवर्क से पल्लवी श्रीवास्तव ने रवि शंकर श्रीवास्तव के अतिरिक्त अपने इस लेख मे श्रीश शर्मा का भी जिक्र किया है और साथ ही बाड़्मेर पुलिस के ब्लॉग का भी।

उन्होने शुरुवात की Blog  के हिन्दी नाम याने चिट्ठा से और फ़िर Archive  के लिये अभिलेखागार और  'Home'  के लिये हिन्दी मे मुख पृष्ठ के साथ ही इण्टर नेट को विश्व-जाल (अन्तर्जाल क्यों नहीं ?) बताया।

बाड़मेर पुलिस चिट्ठे के संयोजक और जनपद के पुलिस अधीक्षक श्री एन डी ब्लग्गन (इनके नाम से ही कुछ आभास हो रहा है) का भी संक्षिप्त साक्षात्कार है। इसके अतिरिक्त भी कई और नाम हैं, जिनके बारे मे कभी सुना नही। पूरा समाचार, पहली तस्वीर को क्लिक करके या फ़िर, टाइम्स ऑफ इन्डिया (दिल्ली संस्करण) के रविवार के डीप फोकस पृष्ठ पर पढ़ा जा सकता है।

Wednesday, June 27, 2007

Please Welcome Www.Chitthajagat.IN । धड़ाधड़ छपते चिट्ठों मे खोजने के लिये।

नारद के विकल्पों की सूची मे एक और नाम!

आज अपनी Site Stat देखत समय एक लिन्क दिखा, जो पहले से जाना पहचाना नही था।

तो आइये देखते हैं चिट्ठाजगत.इन। सबसे पहले परिचय।

http://chitthajagat.in/?humlog=ha

ChJ2

डॉ विपुल जैन द्वारा पञ्जीकृत ये साइट पहली नज़र मे बहुत अच्छी बन पड़ी लगती है।  काफी कुछ नारद से मिलता जुलता है, पर मुझे लगता है कि Programming Part  मे अधिक मेहनत की गयी है।

इसके सूत्रधारों मे हैं स्वयं डॉ विपुल, श्री आलोक जी (वही ९-२-११ वाले) और श्री कुलप्रीत जी।

इसमे बहुत कुछ नया और रोचक है। जैसे

१. सक्रियता क्रमाँक

२. धड़ाधड़ छापने वाले चिट्ठाकार

ChJ1

३. Tag Cloud

४.पञ्जीकरण की सुविधा (स्वचालित) स्वयं के Username और Password  के साथ। http://chitthajagat.in/panjikaran.php

शायद बाकी का परिचय रवि जी दें (उन्होने आज ही इस विषय से सम्बन्धित दो प्रविष्टि लिखी हैं) इसलिये, हम यहीं विश्राम लेते हैं :)।

परीक्षण प्रविष्टि


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

व्यक्तिगत आक्षेप कब तक?

कुछ लोग हिन्दी चिट्ठाकारी के स्तर को गिराने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। यह बात साफ़ है कि नारद की कड़ी कार्रवाई के बावजूद भी लोग व्यक्तिगत आक्षेप करना बन्द नहीं कर रहे हैं। मसिजीवी जी ने लिखा –

जब धुरविरोधी ने हटने की घोषणा की तो “रा च मिश्राजी ने घूम घूमकर लोगों को मेल-ऊलकर” भी ये जताया कि भई ब्‍लॉग डिलीट नहीं हुआ है- हो जाए तो कहना।

पहली बात तो यह कि मैंने अपनी बात अपने चिट्ठे पर स्पष्ट लिखी, कहीं “घूम-घूम” कर उसे नहीं फैलाया। दूसरी बात यह कि आप इस तरह की भाषा का प्रयोग कर जो मदारीगामी अभिव्यंजना पैदा करना चाहते हैं, वह मात्र भाषा के असंयम और सार्वजनिक सम्प्रेषण में अमर्यादा को ही दर्शाती है। इस तरह की व्यक्तिसापेक्ष स्तरहीन बातें आपको शोभा नहीं देती हैं।

धन्यवाद।

कौन है ये धुरविरोधी ?

>स्वागत
>है
>आपका
>आपको
>भी
>जानना
>है
>कि
>कौन
>है
>ये
>धु
>र
>वि
>रो
>धी
>हम
>दिखाते
>हैं
>आपको
>कि
>ये
>है
>धुर
>विरोधी
"सबको पता है-सबको खबर है"

पता चला न, क्या कहा, अभी भी नही?

तो ई मेल कीजिये न,

अरे कहीं, मुझे न कर दीजियेगा,

उन्ही को कीजियेगा ।

मेरे ब्लॉग मे विषाणु (Virus) है|

एक ई मेल सन्देश मिला २३ जून २००७ को ८:३० अपरान्ह (IST 00:00 24th June) पर।

I would like to say ths this blog has a Virus some where in some scripts. It has a pop up and It creates a file netvision.exe in the c:\windows directory and a link of IE to this Netvision in on the desktop and system Quick Launch area in the windows.

ये सूचना जन-साधारण के हित मे प्रसारित है। जैसा कि बताया गया है, मैं एक स्क्रिप्ट प्रयोग करता हूँ|

मै ई मेल भेजने वाले ब्लॉगर का इस तरफ़ ध्यान दिलाने के लिये शुक्रगुजार हूँ, पर मैं वह एक मात्र स्क्रिप्ट अपने ब्लॉग से निकालने मे असमर्थ हूँ। असुविधा के लिये मुझ हार्दिक खेद है।

इसके बावजूद इस ब्लॉग पर आने वाले सभी लोगों का बहुत शुक्रिया एवं बड़ी मेहरबानी।

Sunday, June 24, 2007

Scheduled Posting: Applications in Blogger & WordPress

बहुत सारे लोग कोई भी अच्छा-बुरा काम करने से पहले शुभ मुहूर्त की राह देखते हैं। सो माना जा सकता है कि ब्लॉगर भी इन्ही मे से हैं और वे अपनी कोई विशेष प्रविष्टि, विशिष्ट समय पर ही प्रकाशित करना चाहते हैं तो उनके लिये बहुत काम की चीज है। WordPress के प्रयोगकर्ता अपनी उस पोस्ट को छपने के पहले मुहूरत का टाइम सेट कर दें। इसके लिये पोस्ट टाइम स्टाम्प पर क्लिक करके Edit Time Stamp, Check करें और शुभ मुहूर्त का समय भर दें और Publish पर चटका लगायें। बस हो गया आपका काम। जैसे ही वो शुभघड़ी आयगी आपकी पोस्ट आपके वर्डप्रेस ब्लॉग पर आ जायेगी।

ये उनके लिये भी उपयोगी है जिनको कभी-कभी छपास का दौरा पड़ता है तो एक बार की ही बैठक में हफ़्ते भर का मसाला छाप के फ़ुरसत कर लेते हैं और, उनकी फ़ीड पढ़ने वालों या दिखाने वालों को असहाय छोड़ जाते हैं। पिछले दिनों इस प्रकार के कुछ उदाहरण देखने-पढ़ने को मिले।

और भी, मुहूर्त देख के लिखने वालों का इस बीच अगर कोई नया शुभ मुहूर्त निकल आये या तुरन्त छाप देने का मन करे तो इसमें भी कोई मुश्किल नही बस Time Stamp Edit करके फिर से Publish कर दें।

ये प्रविष्टियाँ आपके WordPress ब्लॉग के मुख पृष्ठ पर अपने नियत समय पर ही दिखेंगी लेकिन URL तो बन ही चुका होता है इसलिये आप लिन्क अपने मित्रों को सुझाव आदि के लिये भेज सकते हैं।

अब आते हैं, ब्लागर पर यहाँ भी यदि आप प्रविष्टि छापने के पहले Post Option मे जाकर समय और तारीख निश्चित कर दें तो ये भी फ़ीड रीडर को आप द्वारा सेट किया समय ही बतायेगा, बशर्ते कि उसके साथ कुछ और समस्या न हो (जैसा कि HindiBlogs.Com के साथ अनुभव हुआ)।

WordPress के विपरीत Blogger मे आपकी भविष्य की प्रविष्टि मुख पृष्ठ पर दिखती रहेगी। इसका अनुप्रयोग आप अपने ब्लॉग पर Sticky Post के रूप में कर सकते हैं। वैसे अगर आप अपनी इस प्रकार की किसी पोस्ट पर टिप्पणी की आवश्यकता नही महसूस करते तो LayOut मे जाकर Blog Post के ऊपर एक HTML-JAVA Script/Text जैसा Widget जोड़ सकते हैं।

Blogger जैसी ये सुविधा WordPress.Com के प्रयोगकर्ताओं को तो नही उपलब्ध, फ़िर भी उनके लिये एक तरीका है कि वे अपने मुख पृष्ठ के लिये Default setting i.e. Your Latest Post के स्थान पर A Static Page चुन कर मुख पृष्ठ एवं प्रविष्टि पृष्ठों मे से चुनाव कर सकते हैं।

इस परीक्षण के परिणाम और अनुप्रयोग की बात समाप्त।

*नारद पर अपनी फ़ीड दिखाने वालों के लिये ये थोड़ा और उपयोगी है, जो कर के ही जाना जा सकता है।

Saturday, June 23, 2007

Test Post: Send Draft to WebLog for Scheduled Posting

To edit Post Options before publishing, similar to Scheduled Posting feature of WordPress.

Sunday, June 17, 2007

नारद को पूरा अधिकार है, क्योंकि...

नारद को किसी ब्लॉग को बिना किसी पूर्वसूचना या व्याख्या के हटाने का अधिकार है। क्योंकि नारद मात्र एक Feed Aggregator  है,  और लोगों को भ्रम है नारद मे लोकतन्त्र का।

नारद [नारद. अक्षरग्राम.कॉम] के प्रति लोगों का अविश्वास, दोषारोपण आदि हास्यास्पद है। क्योंकि नारद एक फ़ीड संकलक है। ये भी एक भ्रम है, यहाँ तक कि, इस सवाल पर कि, एक वाक्य मे नारद का उद्देश्य क्या है? नारद की ओर से एक जिम्मेदार प्रवक्ता ने नारद को मात्र एक संकलक बताया। पर मुझे ऐसा नही लगता।

नारद के प्रति अभिव्यक्ति की स्वन्त्रता की दुहाई देना, मौलिक अधिकारों आदि की बात करना भी मूर्खता है, क्योंकि नारद लोक-तन्त्र नही है। नारद पर लोकतन्त्र नही हो सकता है।

और भी फ़ीड संकलक हैं, अब नारद ही पर इतना विवाद क्यों:

मात्र इसलिये कि नारद पॉपुलर है नारद के पास एक अदृश्य शक्ति है, सब उसका उपयोग करना चाहते हैं, निजी स्वार्थों तक के लिये, जैसा कि मै भी करता हूँ। इसलिये कि नारद हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये बना है। नारद पर आने के लिये मामूली सी शर्त ये कि आप हिन्दी मे लिखते हैं। आपने एक बार पञ्जीकृत होने के बाद, इसका महत्त्व समझ लिया। एक हिन्दी ब्लॉगर को एक सम्पूर्ण समुदाय मिल गया। अब उसको जो अच्छा लगा, लिखना शुरू कर दिया, उत्साह पूर्वक, क्योकि पता है कि लिखने के बाद कुछ सौ लोगों की निगाह तो उस पर (कम से कम शीर्षक पर) पड़ेगी ही (वास्तव मे ऐसा हो या न हो)।

नारद पर लिखा है

नारद पर आपका स्वागत है। नारद आवाज है हिन्दी चिट्टों की। हिन्दी चिट्ठों को देखने का एकमात्र स्थान। नारद आपका अपना वैब स्थल है, इसे बनाने और सजाने संवारने के लिये आपके सुझावों और आलोचनाओं का हार्दिक स्वागत है।

यह सत्य नही है, क्यों कि इस मे व्याकरण, भाषा एवं तथ्य की गलतियाँ हैं। ये नारद के पृष्ठ से जुड़े लोगों का अपना मामला है, मुझे इस बात से कोई फ़र्क नही पड़ता इसलिये मैं विरोध नही करता,  HindiBlogs.Com  को विरोध करने का अधिकार है, क्योकि वह एक व्यावसायिक स्थल (जैसा) है, शायद अभी तक नही किया गया इसलिये कि नारद अव्यावसायिक है लेकिन इसके अतिरिक्त भी कुछ कारण अवश्य हैं।  फ़िर भी बहुत से लोग इस झाँसे मे आ ही जाते हैं कि नारद ऐसा एक मात्र स्थान है :) ।

अभी अभी एक पोस्ट आयी है

नारद अब जर्मनी बन गया है और उसे लोग तानाशाह। कल को मैं भी कुछ लिखूंगा और नारद जी मुझे भी बाहर कर देंगे। मैं नारद के कारण नही हूँ और न ही मुझे नारद के कारण समझा जाय। नारद के लोग जो चाहे मन मानी करें लेकिन मुझे बख्श दें । नारद जी , मुझे भी आप माफ़ ही करें। मैं भी आपके निर्णय से असहमत हूँ। विरोध स्वरूप मेरा चिठ्ठा भी आप अपने यहाँ से बाहर कर दें।

तानाशाह अब बन गया है, इसका मतलब पहले नही था, मतलब पहले लोकतन्त्र था नारद मे(?)।

मैं यहाँ सेंसर शिप लगवाने नही आया। जो मन करेगा लिखूंगा और नही मन करेगा तो नही लिखूंगा। आख़िर चिठ्ठा किसी की निजी सम्पत्ति होती है और उसमे हस्तक्षेप का अधिकार नारद क्या ब्रम्हा को भी नही दिया जा सकता ।

हास्यास्पद! क्या नारद सेंसरशिप लगा सकता है? किसी के मन को कुछ लिखने से रोक सकता है, या हस्तक्षेप कर सकता है? चिट्ठा निजी सम्पत्ति है, ये सही कहा है।

जब हम या आप अपने चिट्ठे पर नारद के प्रति कुछ भी लिखने से पहले, उसके पीछे के व्यक्ति के बारे मे नही सोचते तो नारद मुनि के ऐसा संदेश लिखने पर क्यो आहत महसूस करते हैं?

Narad Muni said...
यदि आप अपना ब्लॉग नारद से हटवाना चाहते है, तो इत्ती बड़ी पोस्ट लिखने की आवश्यकता नही थी, बस एक इमेल लिख देते, कि आपके ब्लॉग को नारद से हटा दिया जाए।

पता नही क्यों पहले या कभी भी या अब भी, लोग नारद को लोकतंत्रात्मक व्यवस्था समझने का भ्रम पाले हुए हैं। नारद के किसी आधिकारिक पृष्ठ पर ऐसा कोई उल्लेख नही है।

ये हो सकता है, कि नारद पर पंजीकृत चिट्ठाकारों के बीच मतभेद होने पर  नारद को महज एक संकलक न समझकर परोक्ष रूप से हस्तक्षेप का निवेदन किया जाता रहा है, जिस पर बार-बार ये बात दुहराई जाती रही कि किसी भी समस्या का हल मिल-बैठकर आम सहमति से निकाला जायेगा। कई बार इस प्रकार नारद के पीछे के व्यक्ति के सहयोग को लोग उसकी लोकतान्त्रिकता समझ बैठे।

नारद के लोकतात्रिक होने की कल्पना करना ही लगभग असम्भव है

नारद अक्षरग्राम.कॉम का हिस्सा है, जो एक व्यक्ति के नाम से पंजीकृत है।

Registrant:
-
- 5178 Mowry Ave #2192 Fremont, CA 94538
,
United States
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Domain Name: AKSHARGRAM.COM
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Expires on: 02-Dec-08
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-
Pankaj Kumar - 5178 Mowry Ave #2192 Fremont, CA 94538

उपर्युक्त सूचना (यहाँ पूरी नही चिपका रहा) सबके लिये मुफ़्त (गुप्त रखने के थोड़े और पैसे लगते हैं) उपलब्ध हैं। पहले केवल सुना था अभी खुद देखा :)।

 वर्तमान मे जो लोग इससे या इसके प्रबन्धन और मेन्टेनेन्स मे जुड़े हैं, वो किसी के द्वारा चुने नही गये हैं। लोकतन्त्र बिना चुनाव के कैसे हो सकता है। जो भी इससे जुड़े हैं मात्र अपनी योग्यता, क्षमता, व्यक्तिगत रुचि एवं इन्टरनेट पर हिन्दी को एक सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिये लगे हैं। इस बात मे मुझे कोई शक नही है।

नारद से किसी भी प्रकार के लोकतन्त्रीय व्यवहार की अपेक्षा नही करनी चाहिये, और किसी व्यक्ति या ब्लॉग को नारद से हटाने को अभिव्यक्ति की स्वन्त्रता से नही जोड़ना चाहिये।

नारद द्वारा कड़ी कार्यवाही पर- मै श्रीश की समबन्धित विषय पर लिखी गयी पोस्ट से काफ़ी हद तक सहमत हूँ, उनको उद्धृत करते हुये मसिजीवी लिखते हैं कि

‘आज नक्सली आए हैं कल उल्फा, बोडो और काश्मीरी आतंकवादी भी नारद पर आ धमकेंगे, वे भी 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' की बात करेंगे, तुम्‍हें भय होगा श्रीश, इस दिन का मुझे तो इंतजार है- अगर इतने भिन्‍न मत रखने वाले और इतने अतिवादी मत रखने वाले हिंदी में, चिट्ठाकारी में, नारद में, संवाद में आस्‍था रखने लगेंगे तो फिर और क्‍या चाहिए।

इनकी बात सही है, कल को वे भी आयेंगे तो क्या उनसे संवाद करना ही गर्व की बात है? वो इसलिये आयेंगे कि वे अपने विचार फ़ैला सकें आपकी और हमारी बात सुनने के लिये नहीं आयेंगे, इसलिये उनकी भी पहचान और स्वयं को सशक्त करना आवश्यक है। आप क्यों नही उनको उनके ही स्थान पर पढते और जानकारी लेते। नारद पर लाने की क्यो हिमायत कर रहे हैं। जहाँ तक संवाद की बात है, इन्टरनेट पर केवल ब्लॉग (वो भी हिन्दी) ही एक जरिया नही है।

इस विषय से सम्बन्धित जिन ब्लॉग पर बहुत टिप्पणियाँ आ चुकी हैं उनका और उनके लिखे के बारे मे मै कुछ कहना जरूरी नही समझता।

नारद एक संकलक मात्र नही है।

जब कि अनूप जी कहते हैं कि ऐसा ही है। नारद एक समाज (Community, Society) जैसा है, और नारद पर एक दूसरे को पढ़्ने वाले एक परिवार के सदस्यों के समान हैं, एक दूसरे से भावनात्मक जुड़ाव है, इस प्रकार के और इस पर आधारित बहुत से निर्णय लिये गये हैं, और आगे भी लिये जाते रहेंगे।

जिन लोगों ने नारद से खुद को बाहर करने की बात कही है, उनकी उसी पोस्ट से स्पष्ट होता है कि वे भावुक हो कर ऐसा कह रहे हैं, यदि उनकी समझ मे आ जाता कि नारद मात्र एक संकलक के अतिरिक्त कुछ नही है, तो ऐसी स्थिति ही न आती।

पहले आईना फ़िर अब धुरविरोधी, ढाई आखर तथा अभी अभी बारह पत्थर ने भी ऐसा ही लिखा है। जब नारद पर फ़ीड दिखना या न दिखना केवल एक मशीनी काम है तो इन पोस्ट्स का क्या मतलब है। मतलब है, भावनात्मक दबाव बनाना, क्योकि ये जानते हैं कि नारद मात्र एक संकलक नही है। धुरविरोधी ने तो अपनी उस पोस्ट के बाद टिप्पणी लेने से भी इन्कार कर दिया :)। उन्होने अपने ब्लॉग को मिटाने की भी बात कही थी जिसका मै व्यक्तिगत रूप से विरोध करता हूँ, जो एक और प्रकार से स्थिति की भावुकता को सिद्ध करता है।

नारद के उद्देश्य के बारे मे कहीं पर स्पष्ट लिखा न मिलने पर मैने सीधे सम्पर्क कर के पूछा तो बताया गया हिन्दी का प्रचार-प्रसार ; ये पूछे जाने पर कि क्या उद्देश्य मे हमारी सभ्यता एवं सन्स्कृति को परावर्तित करना भी है, जवाब हाँ मे प्राप्त हुआ।

ऐसी स्थिति मे नारद द्वारा लिये गये निर्णय से मै सहमत हूँ।

एक बार फ़िर, इसलिये कि नारद महज एक  Aggregator   (नही) है और नारद के द्वारा किसी ब्लॉग की फ़ीड को अपने से अलग करने के निर्णय पर वाद विवाद, हो हल्ला, ज़िन्दाबाद-मुर्दाबाद, आपात काल जैसी स्थिति और किसी प्रकार के मौलिक अधिकारों (अभिव्यक्ति की स्वन्त्रता) के हनन की दुहाई देकर विरोध प्रकट करना अनावश्यक और बेमानी है।

 

मूड बना तो कारण-निवारण पर भी अपने विचार रखूँगा :)।

Friday, June 01, 2007

Blogger Blogs पर टिप्पणीकर्ता के लिये मधुर संदेश।

वर्डप्रेस की अपेक्षा (जहाँ प्रविष्टि पृष्ठ पर ही कमेन्ट फ़ार्म होता है) ब्लागर ब्लाग्स पर (क्लिक करके पॉप-अप या नयी खिड़की खुलने का इन्तज़ार) टिप्पणी करना थोडा अरुचिकर होता है, उस पर से अगर किसी ने वर्ड वेरीफ़िकेशन लगा रखा हो तो कभी-कभी, टिप्पणी की इच्छा समाप्त हो जाती है।

अभी-अभी पता चला है कि आप अपने टिप्पणीकर्ता के लिये एक मधुर संदेश उपलब्ध करा सकते हैं, जो कि टिप्पणी-कर्ता को एक बढिया टिप्पणी के लिये प्रेरित भी कर सकता है।

एक बात और कि आप ये संदेश अपनी हर प्रविष्टि के लिये, अलग अलग रख सकते हैं। आपको करना बस इतना है कि, प्रविष्टि पब्लिश करने के बाद, एक बढिया सा संदेश भावी टिप्पणी कर्ताओं के लिये लिख छोड़ना है।

ये संदेश सादा टेक्स्ट न होकर बढि़या html फ़ॉरमैटेड भी बना सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिये नीचे स्क्रीन शाट देखें।

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ये भी हो सकता है कि जिनका मूड टिप्पणी करने का न भी बन रहा हो वो भी आपका मस्त-मधुर संदेश देखने के लिये ही टिप्पणी के लिन्क पर क्लिक कर दें और फ़िर आपने ज्यादा बंदिशें न लगा रखीं हो तो बोनस मे टिप्पणी ही मिल जाये।

तो अब काल्ह करै सो आज कर आज करै सो अब के अनुसार अभी शुरू हो जाइए।

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अब देखना ये है कि कौन कितनी क्रियात्मकता प्रदर्शित करता है, अपने प्रिय टिप्पणीकारों के लिये।