Sunday, May 11, 2008

आइये चलें चाँद पर..या अभी के लिये अपना नाम ही भेज दें

" टोही चंद्रयान चंद्र ( LRO ) के नाम पर एक मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए अनुसूचित देर और 2008 के उद्देश्य से तैयार करने के लिए और सहायता के लिए मानव चंद्रमा की खोज की है . इस मिशन को बढ़ावा देने और प्रचार , नासा के मूल पहल शुरू किया " आपका नाम को भेजें चंद्रमा " (चंद्रमा पर भेजने के आपके नाम) पर भेजने का वादा किया है जिसके लिए बोर्ड के चंद्र अभियान में जो उन सभी के नाम का उपयोग कर रजिस्टर विशेष रूप से ऑनलाइन है . इसके अलावा , प्रदान करने के बाद उनका नाम भी होगा और उपनाम मुद्रण के लिए संभव हो PDF एक प्रकार की भागीदारी के रूप में प्रमाणपत्र " समर्थकों " के मिशन है .

आइये चलें चाँद पर..अभी के लिये अपना नाम ही भेज दें :)

नाम भेजने के लिये जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय की इस लिन्क पर क्लिक करें

The Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) is built and managed by NASA Goddard Spaceflight Center for NASA. "Send Your Name to the Moon" is a partnership with NASA, the LRO Project,The Johns Hopkins University Applied Physics Laboratory and the Planetary Society.

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"Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) is the name of an exploratory space mission scheduled for late 2008 and aimed to prepare for and support the exploration of human Moon. To promote and publicize this mission, NASA launched the original initiative "Send Your Name To The Moon" (send your name on the Moon) for which promises to send on board the lunar expedition all the names of those who register using the special form online. Moreover, after having provided his name and surname will also be possible to print PDF a kind of certificate of participation as "supporters" of the mission.

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Thursday, April 17, 2008

विज्ञान जब चाँद पर उगेंगे पेड़ पौधे

जब चाँद पर उगेंगे पेड़ पौधे

2020 तक अमरीका एक बार फिर (?) चाँद की सतह पर इंसानी कदम उतारने का सपना रखता है.

वैसे अब भी लोगों को लगता है कि मानव चाँद पर पहुँच चुका है :)
पूरा समाचार बी बी सी के लिन्क पर पढ़ें।

Wednesday, April 16, 2008

गोरे रंग का गुमान और विज्ञान

गोरे रंग का गुमान और विज्ञान:

सत्यम शिवम सुन्दरम आदर्श वाक्य मे सुन्दरता का बड़ा वजन है। अच्छा तन या अच्छा व्यकित्त्व होते हुये भी सुन्दर दिखने के लिये प्रायः त्वचा के लावण्य पर ज्यादा भरोसा किया जाता है। शादी की उम्र आते आते त्वचा की देखरेख मे अच्छे मूल्याँकन की खातिर रुचि बढ़ जाती है।

आज की तारीख मे यह रुचि सनक की हद तक हावी है। साँवली से गोरी बनने की अँधी दौड़ मे लड़्कियाँ बढ़ती हुई तादाद मे शरीक हो रही है। यही नही बल्कि बाज़ार वाद द्वारा हवा दी जा रही है कि दौड़ मे लड़के भी शामिल हो जायें। इससे लगता है कि टी डी एच (टाल डार्क और हैन्ड्सम) वाली अवधारणा लुप्तप्राय हो सकती है। इसमे मुख्य दोष है समाज मे व्याप्त रंग भेद का दिलचस्प बात है कि शादी के बन्धन को सात जन्मों तक कायम रखने के लिये भी सौन्दर्य वर्धन का दामन थामा जा रहा है।

एक क्लास मे एक साँवली लड़की ने एक गोरी लड़की से पूछा, तुम कौन सी क्रीम लगाती हो..उसने बताया फ़ैयर एन लवली...और तुम?..जवाब एक लड़के ने दिया..चेरी ब्लॉसम

ऊपर का वार्तालाप पढ़कर अगर आपको हंसी आयी तो आप भी रंगभेद करते हैं :D

विज्ञान के अनुसार मिलैनिन वह रंग द्रव्य है जो त्वचा के साथ साथ बालों और आँख की पुतली के रंग के लिये जिम्मेदार है। मिलनोसाइट नामक विशिष्ट कोशिकाओं  मे मिलनोज़ोम नामक कोशिकांग मिलैनिन उत्पन्न करता है।

त्वचा के रंग को प्रभावित करने वाले जीनों की संख्या ५ से १० तक मानी जाती है गोरी त्वचा के मिलैनोसोम  मे उपस्थित जीन SLC24A5 और इसका परिवर्ती जीन SLC4SA2 वर्ण-निर्णायक माने गये हैं।

साँवली को गोरी त्वचा बनाने की ख्वाहिश मे मिलानिन की मात्रा मे वाह्य हस्तक्षेप द्वारा परिवर्तन लाने की कोशिशें जारी हैं। हाइड्रोक्विनोन रसायन युक्त ऐसे फ़ेयरनेस क्रीम बनायी गयी हैं, जिनके बारे मे दावा किया जाता है कि चेहरे पर इन्हें नियमित लगाने से गोरापन आ जायेगा।

हाइड्रोक्विनोन टायरोसिनेज नामक एन्जाइम की क्रिया मे बाधा पहुंचाता है जो कि मिलैनिन के निर्माण मे उत्प्रेरक का कार्य करता है।

शीघ्र और शर्तिया प्रभाव उत्पन्न करने के दावे के साथ बेची जाने वाली फ़ेयरनेस क्रीम मे हाइड्रोक्विनोन के मोनोबेन्जाइल ईथर होने की सम्भावना होती है। जो त्वचा केरंग द्रव्य को स्थायी रूप से पूर्णतः नष्ट कर देता है और त्वचा मे अनिश्चित रंग उत्पन्न हो सकता है।

लेकिन इन सब खतरों और दिक्कतों से दूर रहने के लिये ऐसी क्रीम बनायी जाती है जिसमे हाइड्रोक्विनोन की मात्रा न्यूनतम होती है, उसको महीनों लगाने पर भी त्वचा के रंग मे कोई फ़र्क आता नही दिखायी देता। कुछ फ़ेयरनेस क्रीम का प्रयोग दोनो गालों पर 8  के आकार मे करने की सलाह दी जाती है, जिसका असली उद्देश्य क्रीम की खपत और बिक्री बढ़ाना ही होता है।

राइबो न्यूक्लिक एसिड (RNA) के हस्तक्षेप द्वारा साँवला रंग लाने के लिये जिम्मेदार जीन विशेष को निष्क्रिय करने के लिये शोध चल रहे हैं, जिनका मकसद एक सप्ताह के अन्दर त्वचा मे वाँछित गोरापन लाना है।

आर एन ए द्वारा टायरोसिनेज के जीन को निष्क्रिय करने वाला एक लोशन बन चुका है, जिसका परीक्षण जारी है, ऐसे लोशन गोरापन लाने मे कितना सक्षम होंगे ये तो अनिश्चित है पर हमारे देश मे ऐसे उत्पादों का दुष्प्रयोग और दुष्प्रभाव अवश्यंभावी प्रतीत होता है।

यह लेख

राम चन्द्र मिश्र

-301 समोआ, पैसिफ़िक एन्क्लेव,

जी एल कम्पाउन्ड,

आई आई टी मेन गेट,

मुम्बई-400 076

के विज्ञान (March 2008, ISSN: 373-1200 विज्ञान परिषद प्रयाग द्वारा औद्योगिक एवं वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद और जैव तकनीक विभाग भारत सरकार के आंशिक अनुदान द्वारा प्रकाशित)

मे छ्पे मूल आलेख  गोरेपन के भूत का भन्डाफोड़ से प्रेरित और परिष्कृत है।

हिन्दी ब्लॉग : hIndi Blog: गोरे रंग का गुमान �

हिन्दी ब्लॉग : hIndi Blog: गोरे रंग का गुमान �

Tuesday, April 15, 2008

वसन्त नवरात्रि का अन्तिम दिन: कन्याओं का भोज

हमारी तरफ़ उत्तर प्रदेश मे प्रथा है कि वसन्त नवरात्रि के अन्तिम दिन अर्थात राम नवमी (उसी दिन होती है) के दिन ९ कन्याओं की पूजा की जाती है और उन्हे खाना खिलाया जाता हैं।

प्रस्तुत हैं कुछ तस्वीरें।

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The Vasant (वसन्त) or Spring Navratri (नवरात्रि) is widely observed in Himachal Pradesh, Uttarakhand (Uttaranchal), Haryana, Punjab and Jammu and Kashmir. Most Hindu devotees in this part of India undertake Navratri Vrat or fasting. The festival occurs during the beginning of summer season. And it is said that the fasting helps in adapting the body to the changing climate.

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Some of the important Temple fairs in Himachal Pradesh and Uttarakhand are organized during this period.

Almost all the rituals observed during Navratri (held in October-November) are also observed during Vasant Navrati.

One of the important events in Haryana and Punjab is the worshipping of little girls. These little girls symbolically represent Goddess Durga (दुर्गा) and are known as ‘kanjaks कञ्जका.’ It is performed on the eighth day or the Ashtami (अष्टमी) day.

देश के विभिन्न भागों मे इस रीति मे थोड़ा बहुत अन्तर भी है, जैसे कि पण्जाब और हरियाणा में।

इस वर्ष का शरद कालीन नवरात्र ३० सितम्बर से ८ अक्टूबर २००८ तक मनाया जायेगा।

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ऊपर के चित्र मे 'आयुश पाण्डेय', इन्होने अपनी साज सज्जा तो कन्याओं की तरह करवा ली लेकिन दुपट्टा ओढ़ना पसन्द नही आया।